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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी: जामगांव एम की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई से बदली 5 हजार से ज्यादा लोगों की किस्मत, ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ बना ब्रांड

रायपुर, 01 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित जामगांव एम अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था का मॉडल बन चुका है। यहां स्थापित केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (CPU) ने वनोपज और औषधीय पौधों के जरिए हजारों ग्रामीणों — खासकर महिलाओं — को स्थायी आजीविका दी है।

111 एकड़ में फैली विकास की फैक्ट्री

जामगांव एम में 111 एकड़ में विकसित इस आधुनिक प्रसंस्करण केंद्र में छत्तीसगढ़ शासन और राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के माध्यम से जंगलों से प्राप्त उत्पादों का संग्रह, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन किया जाता है। यहां बने उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड के नाम से बाजार में धूम मचा रहे हैं।

आंवला–बेल से लेकर जामुन तक… यहां बन रहा शुद्ध हर्बल खजाना

प्रसंस्करण इकाई-01 में

  • आंवला
  • बेल
  • जामुन

से जूस, कैंडी, मुरब्बा, लच्छा, शरबत, पल्प और रेडी-टू-सर्व (RTS) ड्रिंक तैयार किए जा रहे हैं। ये उत्पाद एनडब्ल्यूएफपी मार्ट और संजीवनी स्टोर के जरिए बेचे जाते हैं।
सिर्फ एक साल में ही यहां से 44 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार हुआ है।

20 हजार मीट्रिक टन का मेगा वेयरहाउस

प्रसंस्करण इकाई-02 में बने चार विशाल गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 20,000 मीट्रिक टन है। यहां
कोदो, कुटकी, रागी, हर्रा, चिरायता, कालमेघ, पलास फूल और साल बीज जैसे वनोपज का भंडारण किया जाता है, जिन्हें रायपुर से निविदा के जरिए बेचा जाता है।

अब तक इन दोनों इकाइयों से 5,200 से अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजित हो चुका है।

PPP मॉडल पर हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट – आय का नया इंजन

जामगांव एम में PPP मॉडल पर स्थापित हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ और स्फेयर बायोटेक कंपनी की संयुक्त पहल है।
यहां से

  • गिलोय
  • कालमेघ
  • अश्वगंधा
  • शतावरी
  • सफेद मुसली
  • जंगली हल्दी
  • गुड़मार
    जैसे औषधीय पौधों से हाई वैल्यू एक्सट्रैक्ट निकाले जा रहे हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं और वेलनेस उत्पादों में होता है।

ग्रामीणों को मिल रहा पूरा पैसा, पूरा भरोसा

इस यूनिट के चलते अब ग्रामीण संग्राहकों से वनोपज का 100% क्रय हो रहा है। इससे उन्हें

  • उचित मूल्य
  • नियमित आमदनी
  • स्थायी रोजगार
    मिल रहा है।

जामगांव एम बना छत्तीसगढ़ के ‘ग्रीन गोल्ड’ का हब

केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई, विशाल वेयरहाउस और हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट ने जामगांव एम को वन आधारित अर्थव्यवस्था का पावरहाउस बना दिया है — जहां जंगल की संपदा अब ग्रामीणों की समृद्धि का आधार बन चुकी है। 🌿

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Manish Tiwari

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