टैक्स टेंशन में टूटा लंदन का ताज : अमीरों का ब्रिटेन से पलायन, दुबई बना नया ठिकाना

लंदन, 24 दिसंबर 2025/ ब्रिटेन सरकार की नई टैक्स नीति अब उल्टा असर दिखाने लगी है। टैक्स में सख्ती बढ़ते ही दुनिया के कई अमीर कारोबारी, निवेशक और सेलिब्रिटी ब्रिटेन छोड़कर यूएई (दुबई) जैसे टैक्स-फ्रेंडली देशों का रुख कर रहे हैं।
पूर्व इंग्लिश फुटबॉलर रियो फर्डिनांड हाल ही में लंदन छोड़कर दुबई शिफ्ट हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इसका बड़ा कारण ब्रिटेन में बढ़ता टैक्स बोझ है।
कौन-कौन छोड़ रहा है ब्रिटेन?
- नसेफ साविरिस – एस्टन विला फुटबॉल क्लब के सह-मालिक और अरबपति, इटली से यूएई शिफ्ट
- हरमन नरुला – भारतीय मूल के टेक उद्यमी, दुबई रवाना
- निक स्टोरोंस्की – रेवोलूट के को-फाउंडर, कैपिटल गेन्स टैक्स से बचने के लिए यूएई में बसे
इन सभी का कहना है कि ब्रिटेन की नई टैक्स पॉलिसी ने निवेश और संपत्ति पर भारी दबाव डाल दिया है।
लंदन में लग्जरी घर बिके, लेकिन रहने वाले कम
ब्रिटेन में अमीरों के जाने की आहट अब प्रॉपर्टी बाजार में भी दिखने लगी है।
- 2025 में 41 लग्जरी प्रॉपर्टी बिकीं
- कुल कीमत करीब 12 हजार करोड़ रुपये
- 2024 में यही आंकड़ा 10 हजार करोड़ रुपये था
- लग्जरी घरों के दामों में करीब 20% उछाल
लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी है कि नए खरीदार साल भर इन घरों में नहीं रहेंगे। इससे बेलग्रेविया, नाइट्सब्रिज और मेफेयर जैसे महंगे इलाके “भूतिया मोहल्ले” बन सकते हैं।
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को झटका?
उद्योगपति मित्तल जैसे बड़े निवेशक सिर्फ टैक्स ही नहीं देते, बल्कि हजारों नौकरियां और अरबों का निवेश भी लाते हैं।
अगर अमीर लोग देश छोड़ते हैं तो:
- निवेश घटेगा
- रोजगार पर असर पड़ेगा
- लंदन की ग्लोबल फाइनेंशियल हब की छवि कमजोर होगी
लेबर पार्टी का दावा है कि टैक्स से सरकारी कर्ज घटेगा और वेलफेयर योजनाओं को पैसा मिलेगा, लेकिन अर्थशास्त्री मानते हैं कि पूंजी पलायन ब्रिटेन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
क्या था ‘नॉन-डॉम’ नियम?
यूके का Non-Dom टैक्स नियम करीब 200 साल पुराना था।
इसका फायदा उन अमीर लोगों को मिलता था जिनकी कमाई विदेशों में होती थी।
इस नियम के तहत:
- विदेशी कमाई पर तब तक टैक्स नहीं लगता था, जब तक पैसा ब्रिटेन न लाया जाए
- विदेशी संपत्ति पर विरासत कर (Inheritance Tax) से भी काफी हद तक बचाव मिलता था
अब इस नियम को खत्म कर दिया गया है, जिससे अमीर निवेशकों का टैक्स कई गुना बढ़ गया।
नतीजा?
ब्रिटेन में टैक्स बढ़ा → अमीर निकले → दुबई बनेगा नया ठिकाना
अब सवाल यह है कि क्या टैक्स बढ़ाकर ब्रिटेन अपनी अर्थव्यवस्था को ही नुकसान पहुंचा रहा है?



