
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) आज घरेलू उड़ान बाजार पर कब्ज़ा किए हुए है, लेकिन इसकी सफलता की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी इसकी रफ्तार। नाम से लेकर बिज़नेस मॉडल तक, इंडिगो ने कई ऐसे कदम उठाए जिन्होंने इसे भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन बना दिया।
क्यों पड़ा ‘इंडिगो’ नाम?
इंडिगो एयरलाइंस के संस्थापक राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने ‘India on the Go’ की थीम पर इसका नाम IndiGo रखा — यानी ‘भारत चलते रहो’, एक ऐसा नाम जो तेज़, आधुनिक और ग्लोबल अपील लिए हुए है।
किराए के प्लेन से हुई इंडिगो की शुरुआत
जब भारत में ज्यादातर एयरलाइंस बोइंग विमानों पर निर्भर थीं, इंडिगो ने बड़ा दांव खेलते हुए 100 एयरबस A320 प्लेन खरीदने का घोषणा कर दिया।
एयरबस के लिए भारतीय बाजार में घुसने का यह बड़ा मौका था, इसलिए उसने इंडिगो को 40–50% डिस्काउंट देकर ये विमान बनाए।
राहुल और राकेश ने:
- 100 विमान आधे दाम पर खरीदे
- बाद में सभी को मुनाफे में बेच दिया
- करीब 200 करोड़ रुपये कमाए
- उसी पैसे से planes को लीज पर लेकर ऑपरेशन शुरू किया
इसी समझदारी भरी चाल से इंडिगो की नींव मजबूत हो गई।
कैसे छू लिया कामयाबी का आसमान?
इंडिगो ने कुछ बातों को अपनी पहचान बनाया:
- महंगी लग्जरी सुविधाओं के बजाय किफायती किराया
- समय पर उड़ान (on-time performance)
- भरोसेमंद सेवा
- भारत के मिडिल क्लास तक सीधी पहुंच
यही वजह थी कि यह जल्दी ही ‘लो-कॉस्ट फेवरेट एयरलाइन’ बन गई।
तेजी से विस्तार की कहानी
इंडिगो ने बड़े ऑर्डर देकर दुनिया को चौंका दिया।
मुख्य पड़ाव:
- 2011: 180 एयरबस A320 का ऑर्डर
- 2012: 50 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन बनी
- 2015: 100 नए विमान का ऑर्डर
- 2019: 250 नए विमान
- 2020: कोविड में भी ठप नहीं—कार्गो सर्विस शुरू की
- 2023: दुनिया का सबसे बड़ा ऑर्डर—500 नए विमान
- 2023: 10 करोड़ यात्रियों को सेवा देने का रिकॉर्ड
अगस्त 2025: अजेय बादशाह
- भारतीय एविएशन मार्केट में 64.2% हिस्सेदारी
- एशिया की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन
- हर दिन 2,700 फ्लाइट्स
- 34 घरेलू और 43 अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर संचालन
इंडिगो आज हर दिन लाखों यात्रियों की पहली पसंद है और भारतीय उड्डयन जगत की ‘किंग ऑफ एयरलाइंस’ कहलाती है।



