संचार साथी ऐप पर हंगामा थमा! सरकार की साफ-साफ चेतावनी— न प्री-इंस्टॉल जरूरी, न कोई जासूसी

नई दिल्ली। संचार साथी ऐप को लेकर फैल रहे भ्रम के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मोबाइल फोनों में संचार साथी ऐप का प्री-इंस्टॉलेशन अनिवार्य नहीं है। विपक्ष के आरोपों और बढ़ते विरोध के बाद सरकार ने साफ कहा है कि यह ऐप पूरी तरह स्वैच्छिक है।
एप जरूरी नहीं, स्वैच्छिक है — ज्योतिरादित्य सिंधिया
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में कहा कि यह ऐप लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
“अगर आप इस्तेमाल करना चाहें तो करें, नहीं तो ऐप को कभी भी डिलीट कर सकते हैं।”
उन्होंने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि यह ऐप लोगों की जासूसी करेगा। सिंधिया ने जोर देकर कहा कि ऐप में कोई कॉल मॉनिटरिंग या निगरानी नहीं की जाती।
क्या था विवाद?
सोमवार को संचार मंत्रालय ने फोन कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे अगले 90 दिनों में अपने हर हैंडसेट में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करें। इसी पर विपक्ष ने निगरानी के आरोप लगाए, जिसके बाद सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा।
सरकार का तर्क — सुरक्षित डिजिटल इंडिया
सरकार का कहना है कि नकली या डुप्लीकेट IMEI नंबर से साइबर सिक्योरिटी को बड़ा खतरा होता है।
इस ऐप से अब तक:
- 26 लाख मोबाइल फोन ट्रेस
- 7.23 लाख फोन वापिस मिले
- 2.25 करोड़ संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन डी-एक्टिवेट
- 22,800 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी रोकी गई (2024)
20 करोड़ लोग पोर्टल का उपयोग कर चुके हैं और 1.5 करोड़ से ज्यादा यूजर्स ऐप डाउनलोड कर चुके हैं।
ऐप में क्या सुविधाएं मिलेंगी?
- चोरी हुए फोन की शिकायत और ब्लॉक की सुविधा
- जैसे ही चोरी का फोन किसी सिम से एक्टिव होगा, पुलिस और यूजर को अलर्ट
- आपके नाम पर कितने सिम जारी हैं—पूरी जानकारी
- अनधिकृत सिम को तुरंत बंद करवा सकेंगे
- मोबाइल हैंडसेट की वैधता की जांच
- अब तक 6.2 लाख फर्जी हैंडसेट ब्लॉक
Apple ने मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया
सरकारी आदेश के अनुसार 28 नवंबर 2025 से सभी हैंडसेट में ऐप प्री-इंस्टॉल करने की बात कही गई थी, लेकिन Apple इस आदेश को मौजूदा रूप में लागू नहीं कर पाएगा।
सूत्रों के मुताबिक Apple इस पर सरकार से चर्चा कर बीच का रास्ता निकालना चाहता है, लेकिन अभी तक एक बैठक में उसने भाग नहीं लिया।
विशेषज्ञों की राय
बीएसएनएल के पूर्व सीएमडी अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से सही है, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐप डेटा का उपयोग कैसे होता है, इसकी नीति बेहद स्पष्ट हो, ताकि यूजर्स के विश्वास और प्राइवेसी का सवाल न उठे।



