
नई दिल्ली, 03 दिसंबर 2025 /जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। एशिया-प्रशांत डिजास्टर रिपोर्ट 2025 के अनुसार आने वाले वर्षों में बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि शहरी इलाकों का तापमान अगले कुछ दशकों में 2°C से 7°C तक बढ़ सकता है। इससे हीट स्ट्रेस, स्वास्थ्य संकट, ऊर्जा की बढ़ी मांग और आर्थिक नुकसान जैसी बड़ी चुनौतियां सामने आएंगी।
कामकाजी क्षमता पर भारी असर
रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती गर्मी लोगों की कार्य क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
1995 से 2030 के बीच गर्मी के कारण कामकाजी घंटों की हानि बढ़कर 3.75 मिलियन से 8.1 मिलियन फुल-टाइम नौकरियों के बराबर होने का अनुमान है।
इसी अवधि में आर्थिक नुकसान का आकलन लगभग 498 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों और गरीबों पर सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट बताती है कि बढ़ती गर्मी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर होगा जो पहले से कमजोर हैं—जैसे गरीब, बच्चे, बुजुर्ग और खुले में काम करने वाले श्रमिक।
उनकी तुलना में हरित और ठंडे इलाकों में रहने वाले उच्च-आय वाले लोग कम प्रभावित होंगे।
दिल्ली समेत बड़े एशियाई शहरों पर बड़ा संकट
रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से
दिल्ली, सियोल, टोक्यो, बीजिंग, कराची, ढाका, मनीला और जकार्ता
जैसे शहरों में तापमान सामान्य से 2°C से 7°C तक ज्यादा महसूस होगा।
अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, पानी, और कूलिंग उपकरणों की मांग कई गुना बढ़ जाएगी।
WHO की चेतावनी: हीटस्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़े
WHO के आंकड़ों के अनुसार:
- 2000-2004 से 2017-2021 के बीच 65+ आयु वर्ग की गर्मी से मौतों में 85% की बढ़ोतरी देखी गई।
- 2000-2019 के बीच हर साल 489,000 गर्मी से मौतें हुईं—जिनमें 45% एशिया और 36% यूरोप में दर्ज की गईं।
- 2022 में अकेले यूरोप में 61,672 अतिरिक्त मौतें गर्मी से हुईं।
भारत के शहरों में भी स्थिति गंभीर
एनआरडीसी इंडिया के क्लाइमेट विशेषज्ञ अभियंत तिवारी बताते हैं कि 2008-2019 के बीच भारत के दस बड़े शहरों में औसतन 1116 लोग हर साल हीटवेव का शिकार बने।
उन्होंने चेताया कि गर्मी का बढ़ता खतरा आने वाले वर्षों में शहरों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।
कृषि पर भी असर—नई प्रजातियों की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते तापमान से
भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश जैसे देशों में खेती पर गंभीर असर पड़ेगा।
हॉर्टिकल्चर विशेषज्ञ अतुल वशिष्ठ के अनुसार अब
- कम पानी में तैयार होने वाली
- गर्मी सहन करने वाली
फसलों और फलों की प्रजातियों पर तेजी से रिसर्च की जरूरत है।
पहाड़ी इलाकों में सेब जैसी फसलों के लिए नई हीट-रेजिस्टेंट वैराइटी विकसित करनी होगी।
शहरों में अर्बन फॉरेस्ट तैयार करना भी जरूरी है ताकि तापमान और प्रदूषण दोनों नियंत्रित हो सकें।
ऊर्जा सेक्टर पर बढ़ता दबाव
गर्मी के चलते एयर-कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट में अनुमान है कि यदि तापमान नियंत्रण में नहीं आया तो 2050 तक AC से ऊर्जा खपत तीन गुना बढ़ सकती है।
बहुत अधिक गर्मी पावर प्लांट की उत्पादन क्षमता और ट्रांसमिशन को भी प्रभावित करेगी।
ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना—भविष्य में बड़ी तबाही
ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा खतरा ग्लेशियरों के पिघलने से पैदा हो रहा है।
17 देशों में ग्लेशियर झील फटने का खतरा बढ़ रहा है और इससे करोड़ों लोग प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- हिमालय क्षेत्र तेजी से गर्म हो रहा है।
- ग्लेशियर पिघलने से कृत्रिम झीलें बनकर कई इलाकों में बड़े पैमाने पर बाढ़ ला सकती हैं।
- भविष्य में पहाड़ी नदियों में जल प्रवाह और समुद्र स्तर दोनों बढ़ने की आशंका है।
हीटस्ट्रोक जानलेवा—डॉक्टरों की सलाह
डॉ. नरेंद्र सैनी के अनुसार मानव शरीर 37°C पर बेहतर कार्य करता है।
जैसे ही तापमान बढ़ता है, अंगों की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
हीटस्ट्रोक की स्थिति में व्यक्ति को तुरंत
- छायादार स्थान पर ले जाना
- शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी रखना
- होश में होने पर ORS देना
और अस्पताल ले जाना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
रिपोर्ट साफ बताती है कि आने वाले वर्षों में गर्मी का खतरा सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि
अर्थव्यवस्था, कृषि, ऊर्जा, जल संसाधन और पर्यावरण—सभी क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी से तैयारी नहीं की गई, तो अगली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।



