आमानाका ब्रिज विवाद: रेलवे ने कब्जा हटाने का नोटिस भेजा, साइंस कॉलेज चौपाटी शिफ्टिंग फिर अटकी

रायपुर | 55 मिनट पहले
आमानाका ब्रिज के नीचे की जमीन को लेकर विवाद और गहरा गया है। रेलवे प्रशासन ने इस जमीन पर अपना दावा करते हुए यहां संचालित ऑटो सर्विस की छोटी दुकानों को 7 दिनों में कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया है। इसके चलते साइंस कॉलेज चौपाटी को ब्रिज के नीचे शिफ्ट करने की योजना एक बार फिर रुक गई है।
चौपाटी में 60 और ब्रिज के नीचे 32 दुकानें संचालित हैं। कुल 92 दुकानदार अब अपने रोजगार और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
निगम ने कहा— चौपाटी शिफ्टिंग फिलहाल होल्ड
रेलवे की नोटिस के बाद रायपुर नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने स्पष्ट किया कि चौपाटी शिफ्टिंग की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। उन्होंने बताया कि रेलवे प्रशासन से बातचीत जारी है और जल्द समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
रेलवे का दावा— जमीन हमारी, पार्किंग की योजना पहले से तैयार
रायपुर रेल मंडल के डीसीएम राकेश सिंह ने कहा कि रेलवे इस जमीन पर पार्किंग विकसित करने की योजना पहले ही बना चुका है। चौपाटी शिफ्टिंग की जानकारी उन्हें प्रशासन या निगम से आधिकारिक रूप से नहीं दी गई। इसी वजह से नोटिस जारी कर कब्जा हटाने को कहा गया है।
अब तक की पूरी कहानी
- करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर चौपाटी विकसित की गई थी, जिसका पूर्व विधायक राजेश मूणत ने कड़ा विरोध किया था।
- 2023 में BJP सरकार आते ही चौपाटी हटाने और यहां नालंदा-2 बनाने की तैयारी तेज हुई।
- नवंबर 2025 में नगरीय प्रशासन ने नालंदा-2 के टेंडर पूरे होने की जानकारी देते हुए 15 नवंबर से चौपाटी शिफ्टिंग की तय तिथि घोषित की।
- लेकिन रेलवे ने पहले ही 32 दुकानदारों को नोटिस भेजकर जमीन पर अपना दावा ठोक दिया।
दुकानदारों की पीड़ा— “अब परिवार पालने की चिंता”
जीवन वर्मा, मैकेनिक:
“पहले भी हमारी दुकान इसी इलाके में थी। विकास कार्यों के कारण 15 साल पहले हम ब्रिज के नीचे आ गए। अब ग्राहक सेट हुए हैं, पर रेलवे दुबारा हटाने बोल रहा है। कहां जाएं?”
धनेश्वर साहू, मैकेनिक:
“18 साल से यहीं काम कर रहा हूं। पार्किंग के लिए दुकानें हटाने की बात चल रही थी, उससे पहले ही रेलवे ने नोटिस दे दिया। अब रोजी-रोटी कैसे चलेगी?”
कांग्रेस नेताओं का समर्थन— ‘यह हठधर्मिता’
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने मौके पर पहुंचकर दुकानदारों से मुलाकात की और पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया।
आकाश तिवारी ने कहा—
“साइंस कॉलेज चौपाटी से न पार्किंग समस्या है, न सुरक्षा का मुद्दा। इसे शिफ्ट करना सिर्फ स्थानीय विधायक की हठधर्मिता है। करोड़ों खर्च कर बनाया, तो जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही हो। दुकानदारों की आजीविका पर संकट हम सहन नहीं होने देंगे।”
निष्कर्ष:
रेलवे और नगर निगम के बीच जमीन विवाद के चलते चौपाटी शिफ्टिंग का मामला फिर अटक गया है। दुकानदारों में चिंता है, और राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। आने वाले दिनों में इस विवाद का समाधान प्रशासन की बातचीत पर निर्भर करेगा।



