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मध्यप्रदेश: बीजेपी के पांच दमदार नेता, जिनके पास एमपी चुनाव की जिम्मेदारी, तीन हैं पीएम मोदी और अमित शाह के ‘आंख-कान’

गृहमंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की कमान संभाल ली है। बीते एक महीने के अंदर दूसरी बार गृहमंत्री अमित शाह 26 जुलाई को भोपाल आ रहे हैं। रात में पार्टी पदाधिकारियों के साथ चुनाव को लेकर रणनीति बनाएंगे। उनके दौरे पहले उन पांच दमदार नेताओं के बारे में आपको बताते हैं, जिन्हें एमपी में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी संगठन में सौंपी गई है। इनमें दो लोग पीएम मोदी और अमित शाह के आंख-कान हैं। संगठन में इन पांच नेताओं की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं खड़का है। सभी दिल्ली के विश्वासपात्र हैं। आइए आपको एक-एक कर उन नेताओं के बारे में बताते हैं।चुनाव प्रबंधक समिति के संयोजक हैं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सबसे पहले बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की करते हैं। वह केंद्रीय कैबिनेट में सीनियर मंत्री हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में नरेंद्र सिंह तोमर को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्हें चुनाव प्रबंधक समिति का संयोजक बनाया गया है। इसका मतलब है कि चुनावी प्रबंधन का सारा काम तोमर ही देखेंगे। वह एमपी के ही रहने वाले हैं। नरेंद्र सिंह तोमर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खास और भरोसेमंद लोगों में से हैं। असम विधानसभा चुनाव में भी इन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। तोमर हमेशा शांत रहते हैं। साथ ही विवादों से दूर रहते हैं।इन तैयारियों के बीच कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को एमपी में चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। भूपेंद्र यादव राजस्थान के रहने वाले हैं। उनके पास संगठन और सरकार दोनों जगह काम करने का अनुभव है। पीएम मोदी और अमित शाह के भरोसेमंद हैं। एमपी के चुनाव के साथ-साथ पीएम मोदी के ड्रीम चीता प्रोजेक्ट की कमान भी उनके हाथों में हैं। भूपेंद्र यादव को एमपी में चुनाव प्रभारी बनाकर यह संदेश दिया है कि इस बार सब कुछ दिल्ली से कंट्रोल होगा। एमपी से पहले बिहार चुनावों में भूपेंद्र यादव ने बड़ी भूमिका निभाई है।ब्यूरोक्रेट्स से नेता बने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी पीएम मोदी और अमित शाह के गुडबुक में हैं। रेलवे का कायाकल्प करने की जिम्मेदारी उनके हाथों में हैं। बालासोर हादसे में उन्होंने काफी सक्रियता दिखाई। विपक्ष इस्तीफे की मांग करी रही थी लेकिन पीएम मोदी का भरोसा उनपर कायम रहा। इसके बाद उन्हें एमपी चुनाव का सह प्रभारी बनाया गया है। वह भूपेंद्र यादव के साथ मिलकर काम करेंगे। भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव के जरिए केंद्रीय टीम एमपी पर नजर रखेगी।वहीं, एमपी में मुरलीधर राव बीजेपी के प्रभारी हैं। वह बीजेपी में आने से पहले संघ में सक्रिय रहे हैं। मूल रूप से मुरलीधर राव दक्षिण भारत के रहने वाले हैं। वह एमपी में बेहतर तरीके से पार्टी का काम देख रहे हैं। कई मौकों पर बैठकों में सख्ती भी दिखाते आए हैं। सरकार और संगठन के बीच समन्वय बनाकर चलते हैं। आरएसएस के अधिक भरोसमंद हैं। प्रदेश संगठन की गतिविधियों से दिल्ली को अवगत कराते रहते हैं।एमपी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी दिल्ली के भरोसेमंद हैं। उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है लेकिन दिल्ली का उन पर भरोसा कायम है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले कोई बदलाव भी नहीं होंगे। केंद्रीय नेतृत्व के यह भी भरोसेमंद हैं। एमपी में खजुराहो से सांसद हैं। इनके अध्यक्ष बनते ही एमपी में बीजेपी की सरकार चौथी बार बनी थी। युवा हैं।गौरतलब है कि एमपी विधानसभा चुनाव की कमान संगठन में इन्हीं पांच नेताओं के हाथ में हैं। सरकार की तरफ से सीएम शिवराज सिंह चौहान हैं। ऐसे में यह साफ है कि एमपी चुनाव बीजेपी में पूरी तरह से दिल्ली के नियंत्रण में हैं। इन्हीं लोगों की मर्जी से सभी चुनावी फैसले लिए जाएंगे।

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Manish Tiwari

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