मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव: बीजेपी ने कुशल रणनीतिकार नरेंद्र सिंह तोमर को बनाया चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक

मध्य प्रदेश में कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं. सत्तारूढ़ बीजेपी ने चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है. शनिवार को बीजेपी हाईकमान ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. तोमर को मध्य प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया गया है. तोमर एमपी के मुरैना से सांसद हैं और ग्वालियर-चंबल इलाके में उनका अच्छा खासा जनाधार भी माना जाता है.तोमर को संगठन में काम करने का भी लंबा अनुभव है. बयानबाजी से दूरी बनाकर रखते हैं और संगठन के लिए काम करने के लिए पहचाने जाते हैं. वे कई राज्यों में चुनाव प्रभारी भी रहे हैं. मध्य प्रदेश में पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा, पार्टी में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभाई है. राष्ट्रीय महासचिव तक बने. तोमर को लेकर कहा जाता है कि उनके पार्टी के क्षेत्रीय नेताओं से भी अच्छे संबंध हैं. कम समय में ही जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव बना लेते हैं. शांत स्वभाव और कार्यकर्ताओं को लेकर आगे बढ़ाने की खूबी उन्हें लोकप्रिय बनाती है.बीजेपी के अंदर यह भी कहा जाता है कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर की जोड़ी का ट्रैक रिकॉर्ड परिणाम देने वाला रहा है. तोमर 2008 और 2013 के चुनाव के वक्त पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे. इन दोनों चुनावों में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी. 2018 में जब बीजेपी चुनाव हारी, तब राकेश सिंह प्रदेश अध्यक्ष थे. उनसे पहले नंद कुमार चौहान प्रदेश अध्यक्ष थे. पहले विधायक, फिर सांसद और केंद्रीय मंत्री बने तोमरतोमर ने स्टूडेंट पॉलिटिक्स से करियर की शुरुआत की. छात्र संघ अध्यक्ष रहे. उसके बाद ग्वालियर नगर निगम में पार्षद चुने गए थे. युवा मोर्चा की जिम्मेदारी भी संभाली. 1998 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था. 2003 में फिर विधायक बने और उमा भारती की कैबिनेट में मंत्री बनाए गए. 2009 में पहली बार मुरैना से सांसद चुने गए. उन्होंने 2014 और 2019 का आम चुनाव भी जीता.कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बनाने की चुनौतीतोमर के सामने बड़ी चुनौतियां भी हैं. चूंकि, वो ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से आते हैं और 2018 के विधानसभा चुनावों में यहां से बीजेपी को निराशा हाथ लगी थी. जबकि कांग्रेस ने जबरदस्त बढ़त बनाई थी. ऐसे में बीजेपी नेतृत्व के सामने प्रदर्शन को सुधारने और जीत हासिल करने के लिए संगठन में सामंजस्य बनाने की चुनौती है. तोमर को स्थानीय होने की वजह से इसका बड़ा फायदा मिल सकता है.



